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हजारों निवेशकों के करोड़ों डूबे, लेकिन 58 मुकदमों में अब तक चार्जशीट नहीं

देहरादून: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित आर्थिक घोटालों में शामिल लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (LUCC) मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल के खिलाफ दोनों राज्यों में 58 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी है। वहीं, मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब आरोपियों की संपत्तियां कुर्क करने और उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार, एलयूसीसी सोसायटी ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में अपनी सैकड़ों शाखाओं के माध्यम से लोगों को ऊंचे ब्याज और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराए। शुरुआत में कुछ निवेशकों को समय पर भुगतान किया गया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा और हजारों लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी सोसायटी में निवेश कर दी। लेकिन बाद में भुगतान पूरी तरह बंद हो गया और कंपनी के प्रमुख अधिकारी फरार हो गए।

बताया जा रहा है कि इस घोटाले से एक लाख से अधिक निवेशक प्रभावित हुए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, सोसायटी ने करीब 800 करोड़ रुपये जमा किए थे, जबकि कथित धोखाधड़ी की राशि 400 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है।

समीर अग्रवाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कुल 58 एफआईआर दर्ज हैं। हालांकि, आरोपी विदेश फरार होने और जांच के बाद मामला सीबीआई को सौंपे जाने के कारण अब तक किसी भी मुकदमे में चार्जशीट दाखिल नहीं हो सकी है।

सीबीआई ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्तियों का पता लगाया है। एजेंसी ने आरोपियों की अचल संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही समीर अग्रवाल के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि उसे विदेश से भारत लाया जा सके।

जांच एजेंसियों का मानना है कि समीर अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद ही इस बहुचर्चित घोटाले में निवेशकों के करोड़ों रुपये के लेन-देन, अन्य आरोपियों की भूमिका और धन की हेराफेरी से जुड़े कई बड़े राज सामने आ सकते हैं। फिलहाल लाखों निवेशकों की निगाहें सीबीआई की जांच और न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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