गुरुग्राम युवराज हत्याकांड: कार में 7 घंटे तक लाश लेकर घूमता रहा कपल, नाले में फेंका; पूर्व सहकर्मी और पति गिरफ्तार

31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा, जो सरिता विहार, दिल्ली के रहने वाले और गुरुग्राम स्थित अडानी रियल्टी में HR प्रोफेशनल/मैनेजर के रूप में काम करते थे, 6 सितंबर 2026 को अपनी बहन के साथ लाजपत नगर के गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट में थे। शाम करीब 4 बजे उन्हें एक फोन आया। उन्होंने बहन से कहा कि उन्हें गुरुग्राम में एक मीटिंग के लिए जाना है और वह रात करीब 10 बजे तक वापस आ जाएंगे।
पुलिस के मुताबिक, युवराज की आखिरी बातचीत उनकी पूर्व ऑफिस सहकर्मी अन्या वत्स से हुई थी। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। परिवार ने कई दिन तलाश करने के बाद 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।
अन्या तक कैसे पहुंची पुलिस?
दिल्ली पुलिस ने युवराज के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, तकनीकी जानकारी और स्थानीय पूछताछ के जरिए जांच आगे बढ़ाई। जांच में अन्या वत्स पर शक गया। उसका फोन भी बंद था, लेकिन पुलिस को पता चला कि वह एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही है।
तकनीकी निगरानी से उस नंबर की लोकेशन उत्तराखंड में मिली। इसके बाद पुलिस टीम उत्तराखंड पहुंची और अन्या वत्स तथा संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर दिल्ली लाई।
कार में क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि युवराज और अन्या की मुलाकात के दौरान युवराज की कार में विवाद/बहस हुई, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई।
कुछ रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि युवराज को कार के अंदर गोली मारी गई, हालांकि पुलिस अभी इस पहलू और गोली लगने के विवरण की पुष्टि के लिए जांच कर रही है।
हत्या के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर युवराज का शव लगभग सात घंटे तक कार में रखा और यह तय करने की कोशिश करते रहे कि शव को कहां ठिकाने लगाया जाए। इसके बाद शव को गुरुग्राम में एक नाले/सीवर में फेंक दिया गया।
नाले में मिला शव
गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में 10 सितंबर के आसपास एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। शव काफी खराब अवस्था में था।
बाद में दिल्ली पुलिस द्वारा परिवार को शव की तस्वीरें दिखाए जाने पर युवराज की बहन ने उसकी पहचान की। कपड़ों और शव के पास मिले सामान से भी पहचान में मदद मिली।
हालांकि शव की बरामदगी और अंतिम प्रक्रिया को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में 10 और 11 सितंबर की अलग-अलग तारीखें दी गई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पहचान न होने के कारण शव का बाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इस हिस्से में पुलिस की अंतिम आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
हत्या की वजह क्या थी?
पुलिस को शुरुआती जांच में पैसों के लेन-देन/वित्तीय विवाद की आशंका है। अन्या और युवराज पहले एक ही रियल एस्टेट कंपनी में काम कर चुके थे। पुलिस यह भी जांच रही है कि अन्या की उस कंपनी से नौकरी जाने और कथित वित्तीय अनियमितताओं का इस विवाद से कोई संबंध था या नहीं। यह पहलू अभी जांच के अधीन है।
दोनों आरोपियों का क्या हुआ?
अन्या वत्स और संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने दोनों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। पुलिस अब हत्या की पूरी घटनाक्रम, दोनों की भूमिका, कथित आर्थिक विवाद, हथियार और अन्य फोरेंसिक/तकनीकी सबूतों की जांच कर रही है।
