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उत्तराखंड में चीनी की जमाखोरी पर सरकार की सख्ती: GST रिटर्न से होगी खरीद-खपत की निगरानी, 15 दिन की स्टॉक सीमा

देहरादून। उत्तराखंड में चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। अब सरकार केवल छापेमारी के भरोसे नहीं रहेगी, बल्कि GST रिटर्न के माध्यम से चीनी की खरीद और खपत पर नजर रखी जाएगी।

सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बड़े उपभोक्ता अपनी वास्तविक जरूरत के मुकाबले कहीं जरूरत से अधिक चीनी का भंडारण तो नहीं कर रहे हैं।

# GST रिटर्न से होगी चीनी की खरीद-खपत की निगरानी

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों और डीलरों से बड़े उपभोक्ताओं को होने वाली चीनी की बिक्री की निगरानी GST रिटर्न के माध्यम से की जाएगी।

बड़े उपभोक्ताओं द्वारा बाजार से खरीदी गई चीनी और उनकी वास्तविक खपत का मिलान किया जाएगा। यदि खरीद और खपत के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आता है, तो यह जांच का आधार बन सकता है कि कहीं संबंधित संस्थान जरूरत से अधिक चीनी का स्टॉक तो नहीं कर रहा।

इस व्यवस्था से सरकार को चीनी की सप्लाई चेन पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी।

# बड़े उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की स्टॉक सीमा

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 19 अगस्त को बड़े चीनी उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की है।

नई व्यवस्था के अनुसार, जिन थोक उपभोक्ताओं की औसत मासिक चीनी खपत 10 मीट्रिक टन से अधिक है, वे अपनी जरूरत के 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे।

यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से लागू होकर 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

# पिछले एक साल की खपत से तय होगी श्रेणी

स्टॉक सीमा के दायरे में कौन-कौन से खरीदार आएंगे, इसका निर्धारण उनकी पिछले एक वर्ष की औसत मासिक खपत के आधार पर किया जाएगा।

मौजूदा महीने को छोड़कर पिछले एक वर्ष के आंकड़ों में यदि किसी संस्थान की औसत मासिक चीनी खपत 10 मीट्रिक टन से अधिक पाई जाती है, तो उसे बड़े उपभोक्ता की श्रेणी में रखा जाएगा।

ऐसे उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा उनकी 15 दिन की औसत जरूरत के बराबर होगी।

# सरकारी संस्थानों को स्टॉक सीमा से छूट

नई स्टॉक सीमा सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू नहीं होगी। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से जुड़े संस्थानों को इस सीमा से छूट दी गई है।

हालांकि, निजी क्षेत्र के बड़े उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन की स्टॉक सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा।

# सरकार का फोकस जमाखोरी रोकने पर

चीनी की कीमतों में तेजी और बाजार में संभावित जमाखोरी को देखते हुए सरकार ने खरीद और वास्तविक खपत के बीच अंतर पर नजर रखने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत बड़े खरीदारों के लिए केवल बड़ी मात्रा में चीनी खरीदना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें अपने स्टॉक और खपत का रिकॉर्ड भी स्पष्ट रखना होगा।

# नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदु

  • चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी सिस्टम सक्रिय।
  • GST रिटर्न के माध्यम से खरीद और खपत पर नजर।
  • चीनी मिलों और डीलरों से बड़े उपभोक्ताओं की खरीद की निगरानी।
  • पिछले एक वर्ष की औसत खपत के आधार पर बड़े उपभोक्ताओं की पहचान।
  • 10 मीट्रिक टन से अधिक औसत मासिक खपत वाले उपभोक्ता इस श्रेणी में आएंगे।
  • निजी क्षेत्र के बड़े उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम 15 दिन का स्टॉक रखने की सीमा।
  • व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
  • केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े संस्थानों तथा स्थानीय निकायों को छूट।
  • खरीद और वास्तविक खपत के बीच अंतर मिलने पर जांच की संभावना।

# निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार की यह नई व्यवस्था चीनी की जमाखोरी, अनावश्यक भंडारण और बाजार में कृत्रिम कमी पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। GST रिटर्न के आंकड़ों के जरिए खरीद और खपत का मिलान होने से बड़े खरीदारों की गतिविधियों पर अधिक व्यवस्थित तरीके से निगरानी रखी जा सकेगी।

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