उत्तराखंड में मां और नवजात की सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती: सुमन रोडमैप-2030 में राज्य को मिली हाई-प्रायोरिटी, धामी सरकार करेगी विशेष निगरानी

उत्तराखंड में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा जारी सुमन रोडमैप-2030 (SUMAN Roadmap-2030) में उत्तराखंड को उच्च-प्राथमिकता (High Priority) वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और कई गांवों की अस्पतालों से लंबी दूरी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। राज्य के कई इलाकों में गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना रहता है।
📌 योजना के प्रमुख बिंदु
✅ रेफरल और परिवहन व्यवस्था होगी मजबूत
आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को तेजी से स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस और रेफरल सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाएगा।
✅ हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष निगरानी
एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य जटिलताओं से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की शुरुआती चरण में पहचान कर विशेष चिकित्सा निगरानी की जाएगी।
✅ आशा कार्यकर्ताओं की बढ़ेगी भूमिका
गर्भावस्था के अंतिम महीनों में आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जानकारी लेंगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचित करेंगी।
✅ दूरस्थ क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति अपनाई जाएगी, ताकि प्रसव से पहले और बाद में मां और नवजात को बेहतर देखभाल मिल सके।
सरकार का लक्ष्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना, सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना और हर गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इस पहल से उत्तराखंड के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
