करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए मजबूत होगी बिजली व्यवस्था, UERC ने दी 31.54 करोड़ की मंजूरी

हरिद्वार। वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेले की तैयारियों को गति देते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने हरिद्वार के बिजली ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए 31.54 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाली भारी बिजली मांग को पूरा करना और श्रद्धालुओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
आयोग की स्वीकृति के तहत 132 केवी ज्वालापुर-रुड़की लाइन तथा 132 केवी सिडकुल-ज्वालापुर (सर्किट-1) लाइन में लगे पुराने कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग (HTLS) कंडक्टर से बदला जाएगा। यह तकनीक कम झुकाव के साथ अधिक बिजली वहन करने में सक्षम होती है, जिससे ट्रांसमिशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और ओवरलोडिंग की समस्या से राहत मिलेगी।
🔌 रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है बिजली की मांग
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) ने आयोग को बताया कि कुंभ 2027 के दौरान हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन के चलते बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके अलावा सिडकुल, बहादराबाद, आईआईपी-4 औद्योगिक क्षेत्र और तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के कारण भी क्षेत्र का विद्युत भार लगातार बढ़ रहा है।
🌟 घाटों, शिविरों और शहर को मिलेगी निर्बाध बिजली
कुंभ मेले के दौरान अस्थायी शिविरों, स्नान घाटों, पार्किंग क्षेत्रों, अस्पतालों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे न केवल मेले की व्यवस्थाएं सुचारु रहेंगी, बल्कि हरिद्वार शहर की दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।
🏗️ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल कुंभ मेले तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में हरिद्वार और आसपास के औद्योगिक व शहरी क्षेत्रों की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक HTLS तकनीक के उपयोग से बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित, प्रभावी और टिकाऊ बनेगी।
कुंभ 2027 को भव्य, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। बिजली नेटवर्क का यह उन्नयन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
