मध्य प्रदेश: दुष्कर्म के प्रयास में की थी मां की जघन्य हत्या, बेटे को मिली फांसी की सजा

मध्य प्रदेश: मां से दुष्कर्म की कोशिश, विरोध पर हत्या; बेटे संतोष लोधी को फांसी की सजा
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। अदालत ने अपनी 50 वर्षीय मां की हत्या के मामले में उसके बेटे संतोष लोधी (26) को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध को अत्यंत जघन्य माना। फैसला बंडा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने सुनाया।
19 जुलाई 2025 की रात क्या हुआ?
यह घटना सागर जिले के विनायका थाना क्षेत्र के रोड़ा गांव की है। अभियोजन के अनुसार, 19 जुलाई 2025 को मृतका के पति सीताराम लोधी अपनी बेटी को लेने छतरपुर गए थे। घर पर उनकी पत्नी और 26 वर्षीय बेटा संतोष मौजूद थे।
अगले दिन 20 जुलाई को जब सीताराम घर वापस लौटे तो उन्होंने आंगन में अपनी पत्नी का लहूलुहान शव पड़ा देखा। वहीं उनका बेटा संतोष घर से गायब था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई।
दुष्कर्म की कोशिश का आरोप
पुलिस की जांच के मुताबिक, घर में मां को अकेला पाकर संतोष ने उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। महिला ने इसका विरोध किया, जिसके बाद आरोपी ने उन पर पत्थर से हमला कर दिया। हमले में उनकी मौत हो गई। कुछ रिपोर्टों में हत्या के लिए कुल्हाड़ी से वार किए जाने का भी उल्लेख है; उपलब्ध रिपोर्टों में हथियार को लेकर अंतर है।
हत्या के बाद संतोष मौके से फरार हो गया था।
25 जुलाई को हुई गिरफ्तारी
जांच के बाद पुलिस ने संतोष को 25 जुलाई 2025 को बांदरी-मालथौन रोड से गिरफ्तार किया। पुलिस ने मामले में लगभग 150 पन्नों की चार्जशीट तैयार की और 18 नवंबर 2025 को अदालत में चालान पेश किया
पिता अपने बयान से पलट गए
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के पति और आरोपी के पिता सीताराम लोधी अपने पहले बयान से मुकर गए। इससे अभियोजन के प्रत्यक्ष साक्ष्य का पक्ष कमजोर हुआ, लेकिन पुलिस के पास वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्य मौजूद थे।
DNA और फिंगरप्रिंट बने सबसे अहम सबूत
अभियोजन ने अदालत के सामने घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट और मृतका के शरीर से लिए गए जैविक नमूनों को पेश किया।
फॉरेंसिक जांच में जैविक नमूनों से प्राप्त DNA का मिलान संतोष के DNA से होने की बात सामने आई। अदालत के सामने इन वैज्ञानिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर रखा गया।
मुकदमे के दौरान आरोपी के पिता समेत 25 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए।
कोर्ट ने क्यों सुनाई फांसी?
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संतोष को दोषी माना और अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड सुनाया। अभियोजन पक्ष ने इसे अत्यंत जघन्य अपराध बताया।
इस मामले की खास बात यह रही कि एक प्रमुख गवाह के बयान से पलटने के बावजूद DNA, फिंगरप्रिंट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों ने अभियोजन के मामले को मजबूती दी।
