कुंभ से पहले चुनावी शंखनाद! उत्तराखंड में भाजपा ने तेज की तैयारियां

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—क्या राज्य में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले हो सकते हैं? हरिद्वार में प्रस्तावित महाकुंभ और संभावित चुनावी कार्यक्रम के बीच तालमेल की चुनौतियों को देखते हुए सियासी गलियारों में समयपूर्व चुनाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
इन्हीं संभावनाओं के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को नया रफ्तार देना शुरू कर दिया है। पार्टी 2027 तक इंतजार करने के बजाय 2026 के अंतिम महीनों को ही चुनावी लक्ष्य मानकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुट गई है।
भाजपा का लक्ष्य राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना है। पार्टी नेतृत्व को विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ, मजबूत संगठनात्मक ढांचा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती स्वीकार्यता उसके लिए बड़ी ताकत साबित होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि चुनाव समय से पहले होते हैं तो भाजपा को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है, क्योंकि विपक्ष अभी पूरी तरह चुनावी मोड में नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल संगठनात्मक मजबूती और मुद्दों की तलाश में जुटे हैं, जबकि भाजपा पहले से ही चुनावी मैदान में उतरती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी प्रदेशभर में बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता सम्मेलन, लाभार्थी संपर्क अभियान और संगठन विस्तार जैसे कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। भाजपा की रणनीति साफ है—अगर चुनाव जल्दी होते हैं तो भी तैयार रहना है और यदि तय समय पर होते हैं तो तब तक राजनीतिक बढ़त बनाए रखनी है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि हरिद्वार महाकुंभ और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की संभावित टाइमिंग राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है। फिलहाल भाजपा ने अपने चुनावी रथ के पहिए तेज कर दिए हैं और सियासी कुरुक्षेत्र में बढ़त बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
