उत्तराखंड बॉर्डर पर तनाव: पुलिस को चकमा देकर घुसे निहंग, DM-SSP ने संभाला मोर्चा

देहरादून: उत्तराखंड में कर्णप्रयाग विवाद के बाद उपजे तनाव का असर गुरुवार रात राजधानी देहरादून तक पहुंच गया। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से बड़ी संख्या में निहंगों का जत्था उत्तराखंड की ओर बढ़ा। पुलिस ने कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ निहंग वैकल्पिक रास्तों से आगे निकल गए, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद देहरादून समेत सीमावर्ती इलाकों में पूरी रात हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल देर रात तक स्वयं मौके पर मौजूद रहे। प्रेमनगर, शिमला बाईपास, कुल्हाल, विकासनगर, आईएसबीटी, ऋषिकेश रोड और शहर के अन्य प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल, पीएसी और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई। कई स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया और ड्रोन के माध्यम से भी निगरानी रखी गई।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 16 जून को चमोली के कर्णप्रयाग बाजार में पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों और कुछ निहंग श्रद्धालुओं के बीच हुई झड़प से शुरू हुआ था। इस घटना में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे और पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद सिख संगठनों ने कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। बाद में नागरसू गुरुद्वारे में भी तनाव की स्थिति बनी, जिसे कई दिनों की बातचीत के बाद शांत कराया गया।
बॉर्डर पर घंटों चला गतिरोध
गुरुवार को पांवटा साहिब गुरुद्वारे में प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन शुरुआती बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद निहंगों का जत्था कुल्हाल बॉर्डर की ओर बढ़ा। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोग बैरिकेड पार कर आगे निकल गए। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और लगातार बातचीत जारी रखी।
रातभर चला हाई अलर्ट, आखिरकार बनी सहमति
कई घंटों तक चले तनाव और वार्ता के बाद देर रात दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। प्रशासन के अनुरोध पर अधिकांश निहंग शांतिपूर्वक वापस पांवटा साहिब लौटने के लिए तैयार हो गए। कुछ निहंगों को देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे में ठहराया गया, जहां आगे भी बातचीत हुई। बाद में पुलिस की निगरानी में उन्हें सुरक्षित हिमाचल प्रदेश वापस भेज दिया गया। किसी भी प्रकार की बड़ी हिंसा या जनहानि की सूचना नहीं मिली।
प्रशासन की अपील
उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सोशल मीडिया पर भ्रामक या भड़काऊ संदेश साझा न करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
