दिल्ली जाने वालों के लिए राहत: कांवड़ यात्रा के दौरान साधारण बसें भी दौड़ेंगी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर

देहरादून: कांवड़ मेले में सभी रोडवेज बसें चलेंगी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से, यात्रियों को जाम से मिलेगी बड़ी राहत
कांवड़ मेले के दौरान देहरादून से दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तराखंड परिवहन निगम ने निर्णय लिया है कि मेले के दौरान वॉल्वो और एसी बसों के साथ-साथ साधारण (ऑर्डिनरी) बसों का संचालन भी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से किया जाएगा, जिससे यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और सफर पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम होगा।
अब साधारण बसें भी एक्सप्रेसवे से जाएंगी
अब तक केवल वॉल्वो और एसी बसों का संचालन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से किया जा रहा था, जबकि साधारण बसें पुराने मार्ग बिहारीगढ़, छुटमलपुर, रुड़की, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर, मेरठ और मोहन नगर होते हुए दिल्ली आईएसबीटी और आनंद विहार तक पहुंचती थीं।
कांवड़ यात्रा के दौरान भारी ट्रैफिक और जाम को देखते हुए अब सभी बसों को एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली भेजा जाएगा, जिससे यात्रियों का सफर काफी आसान हो जाएगा।
साढ़े तीन घंटे में पूरा होगा सफर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद वॉल्वो और एसी बसें करीब साढ़े तीन घंटे में दिल्ली पहुंच रही हैं। अब साधारण बसों को भी इसी मार्ग से भेजे जाने से यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अधिक आरामदायक होगी।
रोडवेज को होगा राजस्व का नुकसान
हालांकि इस फैसले से उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) को आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। सामान्य मार्ग पर चलने वाली साधारण बसों को रास्ते में कई स्थानों से सवारियां मिलती थीं, जिससे निगम को अच्छा राजस्व प्राप्त होता था।
इसके विपरीत एक्सप्रेसवे पर बीच में कोई स्टॉपेज नहीं है, इसलिए अतिरिक्त यात्रियों से मिलने वाली आय नहीं हो पाएगी। इसके बावजूद कांवड़ मेले में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता दी गई है।
प्रतिदिन 95 बसें जाती हैं दिल्ली
ग्रामीण डिपो के सहायक महाप्रबंधक प्रतीक जैन ने बताया कि देहरादून आईएसबीटी से प्रतिदिन करीब 95 बसें दिल्ली के लिए संचालित होती हैं, जिनमें वॉल्वो, एसी और साधारण बसें शामिल हैं। कांवड़ मेले के दौरान इन सभी बसों को एक्सप्रेसवे से संचालित किया जाएगा।
100 करोड़ से अधिक के घाटे से जूझ रहा रोडवेज
उत्तराखंड परिवहन निगम इस समय 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी का सामना कर रहा है। निगम लगातार आय बढ़ाने के प्रयास कर रहा है, लेकिन आर्थिक स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई बार कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी देरी की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
