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अपने ऐतिहासिक फैसलों से जनता के दिलों में अमर रहेंगे जनरल खंडूड़ी, उनकी 5 नीतियां आज भी मिसाल

INDIA – JUNE 25: Retired Major General Bhuwan Chandra Khanduri, Chief Minister of Uttarakhand at BJP National working committee meeting in New Delhi, India (Photo by Sipra Das/The The India Today Group via Getty Images)

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) का कार्यकाल राज्य की राजनीति में पारदर्शिता, ईमानदारी और सुशासन की मिसाल के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने ऐसे कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा दी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश दिया।

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में जब भी शुचिता, पारदर्शिता, सख्त प्रशासन और जनहित के निर्णयों की बात होगी, तब मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कई साहसिक कदम उठाए, जिनकी चर्चा आज भी होती है।

खंडूड़ी सरकार की 5 ऐतिहासिक नीतियां

1. देश का सबसे सख्त लोकायुक्त बिल

वर्ष 2011 में खंडूड़ी सरकार ने उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक पारित कर इतिहास रच दिया था। इस कानून को देश का सबसे सख्त भ्रष्टाचार विरोधी कानून माना गया। इसकी खास बात यह थी कि इसके दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक के साथ-साथ IAS और IPS अधिकारियों को भी शामिल किया गया। समाजसेवी अन्ना हजारे की टीम ने भी इसे आदर्श मॉडल बताया था।

2. पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर सख्ती

खंडूड़ी ने सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कई सख्त निर्देश लागू किए। उनकी साफ-सुथरी छवि ने जनता में सरकार के प्रति विश्वास मजबूत किया।

3. सख्त भू-कानून की पहल

राज्य की जमीनों को बाहरी कब्जों और अनियंत्रित खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए उन्होंने कठोर भू-कानून लागू करने की दिशा में मजबूत पहल की। यह फैसला पहाड़ों की संस्कृति और संसाधनों की सुरक्षा के लिए अहम माना गया।

4. सड़क और आधारभूत ढांचे पर विशेष जोर

उनके कार्यकाल में सड़कों, पुलों और ग्रामीण संपर्क मार्गों के विकास को प्राथमिकता दी गई। पहाड़ी क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं।

5. सुशासन और अनुशासन का मॉडल

सेना की पृष्ठभूमि से आने वाले खंडूड़ी अपने अनुशासन और कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने शासन में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य संस्कृति को बढ़ावा दिया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार देखने को मिला।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके फैसले, ईमानदार छवि और जनहित में किए गए कार्य हमेशा उत्तराखंड की राजनीति में एक आदर्श के रूप में याद किए जाते रहेंगे।

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