अयोध्या घटना के बाद उत्तराखंड के चारधाम मंदिरों में बढ़ी सुरक्षा, दान व्यवस्था पर कड़ी निगरानी

देहरादून। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड के चारधाम मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। श्रद्धालुओं के चढ़ावे की सुरक्षा और दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंदिरों में प्राप्त होने वाले नकद चढ़ावे, सोना-चांदी और अन्य दान सामग्री की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कर्मचारियों को चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड रखने और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन करने को कहा गया है।
इन व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी
समिति ने मंदिरों के दान काउंटर, दान पेटियां, चढ़ावा गिनती स्थल, लेखा विभाग, खजाना, पूजा काउंटर और विश्रामगृहों में तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक दान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसका लेखा-जोखा तैयार करने के आदेश दिए गए हैं।
श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता
BKTC का कहना है कि चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में नकद राशि, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं दान करते हैं। ऐसे में दान व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रखना समिति की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
45 से अधिक मंदिरों में लागू होंगे निर्देश
ये निर्देश केवल बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि BKTC के अधीन संचालित लगभग 45 मंदिरों में लागू किए जाएंगे। समिति ने सभी संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
एहतियाती कदम, चारधाम में चोरी की कोई घटना नहीं
गौरतलब है कि उत्तराखंड के चारधाम मंदिरों में चढ़ावा चोरी की कोई घटना सामने नहीं आई है। अयोध्या राम मंदिर में सामने आए मामले के बाद एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या सुरक्षा चूक की संभावना को पूरी तरह रोका जा सके
