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एम्स ऋषिकेश पर 60 हजार का मुआवजा, मेडिकल रिकॉर्ड में गलत HIV पॉजिटिव दर्ज करने का मामला

⚠️ दो अस्पतालों की रिपोर्ट निगेटिव, फिर भी एम्स के रिकॉर्ड में HIV पॉजिटिव!

देहरादून/ऋषिकेश: एम्स ऋषिकेश के मेडिकल रिकॉर्ड में एक व्यक्ति को बिना पुख्ता चिकित्सकीय प्रमाण के HIV पॉजिटिव दर्ज करने के मामले में उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अहम फैसला सुनाया है।

आयोग ने हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग के पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए एम्स की अपील खारिज कर दी। इसके तहत संबंधित व्यक्ति को ₹50,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमेबाजी खर्च, यानी कुल ₹60,000 देने होंगे।

क्या है पूरा मामला?

बताया गया कि जुलाई 2014 में तबीयत खराब होने के बाद संबंधित व्यक्ति को एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। 16 जुलाई को डिस्चार्ज के दौरान उसके मेडिकल रिकॉर्ड/डिस्चार्ज सारांश में HIV पॉजिटिव दर्ज किया गया।

इसके बाद व्यक्ति ने देहरादून के श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज में HIV जांच कराई, जहां रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में भी जांच कराई गई और वहां भी HIV निगेटिव पाया गया।

आयोग ने क्या माना?

राज्य आयोग ने कहा कि HIV जैसी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति का निदान उचित जांच और चिकित्सकीय प्रमाणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। आयोग के अनुसार एम्स यह साबित नहीं कर सका कि मेडिकल रिकॉर्ड में HIV पॉजिटिव दर्ज करने का आधार कोई मान्य जांच या निर्धारित प्रोटोकॉल था।

एम्स की ओर से यह दलील दी गई कि उस समय संस्थान में HIV परीक्षण के लिए एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र नहीं था और एम्स ने स्वयं HIV जांच नहीं की थी। हालांकि आयोग ने एम्स के मेडिकल रिकॉर्ड में HIV पॉजिटिव दर्ज होने को उसकी दलील के विपरीत माना।

सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा का भी उल्लेख

आयोग ने माना कि बिना पर्याप्त नैदानिक प्रमाण के किसी व्यक्ति को आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में बार-बार HIV पॉजिटिव दर्ज करना गंभीर लापरवाही है। ऐसे रिकॉर्ड के कारण व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, भावनात्मक परेशानी और सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ सकता है।

हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग ने 22 अप्रैल 2019 को ₹50,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया था। अब राज्य आयोग ने एम्स की अपील खारिज करते हुए इसी आदेश को बरकरार रखा है।

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