जन्माष्टमी पर ‘बाल गोपाल’ के जन्म का क्रेज, उत्तराखंड के निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव सीजेरियन

देहरादून: उत्तराखंड में सीजेरियन प्रसव का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। अब बच्चे के जन्म की तारीख और समय को लेकर भी परिवारों की पसंद बदल रही है। जन्माष्टमी जैसे शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण से बच्चे के जन्मदिन को जोड़ने की चाहत के चलते कई परिवार शुभ मुहूर्त में प्रसव कराने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार केवल मुहूर्त सीजेरियन प्रसव बढ़ने का कारण नहीं है, लेकिन यह बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय जरूर है।
हल्द्वानी में 12 परिवारों ने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में प्रसव कराने की इच्छा जताई, जबकि देहरादून के निजी अस्पतालों में 20 से अधिक परिवारों ने ऑपरेशन के जरिए शुभ संयोग में बच्चे के जन्म का अनुरोध किया। इससे यह सामने आया है कि कुछ परिवार अब प्राकृतिक रूप से प्रसव होने का इंतजार करने के बजाय अपनी पसंद की तारीख और शुभ समय को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव सीजेरियन
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड के निजी स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव में 47.7 प्रतिशत सीजेरियन होते हैं। यानी निजी अस्पतालों में लगभग हर दूसरा बच्चा ऑपरेशन के जरिए जन्म ले रहा है।
इसके मुकाबले सरकारी अस्पतालों में सीजेरियन प्रसव की दर 14.7 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार निजी स्वास्थ्य संस्थानों में सीजेरियन प्रसव की दर सरकारी संस्थानों की तुलना में तीन गुने से भी अधिक है।
एक दशक में लगभग दोगुनी हुई सीजेरियन दर
उत्तराखंड में सीजेरियन प्रसव की दर पिछले एक दशक में लगातार बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक NFHS-4 में राज्य में सीजेरियन प्रसव की दर 13.1 प्रतिशत थी, जो NFHS-5 में बढ़कर 20.4 प्रतिशत और NFHS-6 में 25.9 प्रतिशत हो गई।
| स्वास्थ्य सर्वेक्षण | सीजेरियन प्रसव |
|---|---|
| NFHS-4 | 13.1% |
| NFHS-5 | 20.4% |
| NFHS-6 | 25.9% |
निजी अस्पतालों में तेजी से बढ़ा ऑपरेशन से प्रसव
NFHS-5 और NFHS-6 के आंकड़ों की तुलना करें तो निजी संस्थानों में सीजेरियन प्रसव 43.3 प्रतिशत से बढ़कर 47.7 प्रतिशत हो गया। वहीं सरकारी अस्पतालों में यह दर 14.0 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत हुई।
| संस्थान | NFHS-5 | NFHS-6 |
|---|---|---|
| कुल सीजेरियन प्रसव | 20.4% | 25.9% |
| निजी स्वास्थ्य संस्थान | 43.3% | 47.7% |
| सरकारी अस्पताल | 14.0% | 14.7% |
अस्पतालों में प्रसव बढ़े, सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी घटी
राज्य में संस्थागत प्रसव की पहुंच जरूर बढ़ी है। NFHS-5 में 83.2 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हुए थे, जो NFHS-6 में बढ़कर 88.9 प्रतिशत हो गए। लेकिन इसी अवधि में सरकारी संस्थानों में होने वाले प्रसव का हिस्सा 53.3 प्रतिशत से घटकर 49.9 प्रतिशत रह गया।
यानी अस्पतालों में प्रसव कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की तुलना में निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी बढ़ी है।
नैनीताल में सबसे ज्यादा सीजेरियन प्रसव
जिलावार आंकड़ों में नैनीताल 30.1 प्रतिशत सीजेरियन प्रसव के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद देहरादून में 25.8 प्रतिशत, हरिद्वार में 22.1 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में 20.4 प्रतिशत सीजेरियन प्रसव दर्ज किए गए।
जिलावार स्थिति:
- नैनीताल: 30.1%
- देहरादून: 25.8%
- हरिद्वार: 22.1%
- ऊधमसिंह नगर: 20.4%
- पिथौरागढ़: 17.0%
- रुद्रप्रयाग: 16.7%
- अल्मोड़ा: 16.3%
- चंपावत: 16.3%
- टिहरी: 15.0%
- बागेश्वर: 12.4%
- गढ़वाल: 9.4%
- चमोली: 8.8%
- उत्तरकाशी: 6.2%
शुभ मुहूर्त के साथ बढ़ रही ऑपरेशन की मांग
जन्माष्टमी जैसे धार्मिक अवसर पर बच्चे के जन्म को शुभ मानने की सोच के चलते कुछ परिवार विशेष समय में प्रसव कराने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, चिकित्सकीय रूप से सीजेरियन प्रसव का निर्णय मां और बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। केवल शुभ मुहूर्त के लिए ऑपरेशन कराने की बढ़ती मांग सीजेरियन प्रसव की बढ़ती दर के बीच एक नई सामाजिक प्रवृत्ति के रूप में सामने आ रही है।
