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देहरादून का ऐतिहासिक FRI फिर हुआ ओपन, लेकिन बढ़ी फीस ने पर्यटकों को चौंकाया

देहरादून स्थित देश के प्रतिष्ठित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) को चार महीने बाद एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। मरम्मत कार्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं के चलते जनवरी के अंत से बंद किया गया एफआरआइ अब नए नियमों और कड़ी व्यवस्थाओं के साथ सोमवार से आम लोगों के लिए फिर से शुरू हो गया है। हालांकि इस बार पर्यटकों को यहां घूमने के लिए पहले से कहीं ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

एफआरआइ प्रशासन ने प्रवेश और संग्रहालय भ्रमण की नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं, जिनमें कई श्रेणियों में 100 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी की गई है। नई व्यवस्था के तहत भारतीय नागरिकों के लिए पैदल प्रवेश शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है, जबकि विदेशी पर्यटकों को अब 1000 रुपये देने होंगे। वहीं संग्रहालय भ्रमण के लिए भारतीय वयस्कों से 150 रुपये और विदेशी नागरिकों से 1500 रुपये शुल्क लिया जाएगा।

संस्थान परिसर में दोपहिया वाहन, निजी कार, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और बसों के लिए भी अलग-अलग प्रवेश शुल्क निर्धारित किए गए हैं। बिना अनुमति प्रवेश करने पर 1000 रुपये प्रति व्यक्ति जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य परिसर की सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

एफआरआइ केवल एक शैक्षणिक संस्थान ही नहीं, बल्कि देहरादून की पहचान और पर्यटन का बड़ा आकर्षण भी है। करीब 450 से 500 हेक्टेयर में फैला इसका विशाल परिसर हरियाली, दुर्लभ वृक्ष प्रजातियों, प्रयोगशालाओं, संग्रहालयों और ऐतिहासिक भवनों के लिए जाना जाता है। इसका भव्य मुख्य भवन ब्रिटिशकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है, जिसे प्रसिद्ध वास्तुकार सी.जी. ब्लामफील्ड ने डिजाइन किया था। लाल ईंटों से बनी यह इमारत कभी दुनिया की सबसे बड़ी ईंट निर्मित इमारतों में गिनी जाती थी।

वर्ष 1878 में फॉरेस्ट स्कूल के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज देश के प्रमुख वन अनुसंधान केंद्रों में शामिल है और 1991 में इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला था। लंबे इंतजार के बाद अब पर्यटक फिर से इसकी खूबसूरती और ऐतिहासिक विरासत का आनंद ले सकेंगे, हालांकि इसके लिए उन्हें अब ज्यादा जेब ढीली करनी होगी ।

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