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देहरादून कोर्ट का सख्त फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 20 साल की सजा

देहरादून: देहरादून की फास्ट ट्रैक पोक्सो अदालत ने नाबालिग किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में दोषी को कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट/पोक्सो) मंजु सिंह मुंडे ने आरोपी मनोज कुमार को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

स्कूल से लौटते समय हुई थी घटना

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार के अनुसार, 28 फरवरी 2025 को वसंत विहार थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 14 वर्षीय पुत्री स्कूल गई थी, लेकिन घर वापस नहीं लौटी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पहले गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि किशोरी का अपहरण किया गया है। इसके बाद मनोज कुमार, निवासी ग्राम बांगर, जिला बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश), के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

अलीगढ़ से हुई आरोपी की गिरफ्तारी

जांच के दौरान पुलिस ने 3 मार्च 2025 को आरोपी को अलीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया और किशोरी को सकुशल बरामद किया। इसके बाद दोनों को देहरादून लाया गया, जहां मामले की विस्तृत जांच की गई।

पहले करता था पीछा

अदालत में दर्ज पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी पहले उसके घर के पास किराए पर रहता था और लंबे समय से उसका पीछा करता था। इसकी शिकायत मकान मालिक से किए जाने पर आरोपी को मकान खाली करना पड़ा था।

घटना वाले दिन जब किशोरी स्कूल जा रही थी, तभी आरोपी रास्ते में मिला और बात करने के बहाने उसे अपने साथ ले गया। वह उसे पहले आईएसबीटी देहरादून ले गया और वहां से बस के जरिए अलीगढ़ पहुंचा।

कई दिनों तक बनाया बंधक

पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी उसे एक मकान में ले गया, जहां करीब चार से पांच दिनों तक रखा गया। इस दौरान उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया। 3 मार्च को पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किशोरी को बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

डीएनए रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अदालत में प्रस्तुत किया। पीड़िता और आरोपी का डीएनए परीक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में दोनों का डीएनए मेल खाने की पुष्टि हुई। अदालत ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए अन्य गवाहों और दस्तावेजों के साथ आरोपी को दोषी ठहराया।

अदालत का सख्त संदेश

फास्ट ट्रैक पोक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराध अत्यंत गंभीर अपराध हैं और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड दिया जाएगा। अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ ₹1.10 लाख का जुर्माना भी लगाया।

यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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