बदरीनाथ चढ़ावा मामले में बढ़ा राजनीतिक घमासान, द्विवेदी ने गोदियाल को दी दस्तावेजों के साथ बहस की चुनौती

देहरादून: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित चढ़ावा अनियमितता मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। बुधवार को बीकेटीसी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में दोषी कोई भी हो, उसे कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने गणेश गोदियाल को एक बार फिर दस्तावेज़ों और तथ्यों के आधार पर सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी।
“दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा”
द्विवेदी ने कहा कि जैसे ही कथित अनियमितता का मामला सामने आया, संबंधित कर्मचारी को तत्काल निलंबित किया गया, उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई और राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पुलिस और विभागीय स्तर पर समानांतर रूप से चल रही है तथा जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस्तीफे की अटकलों को किया खारिज
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी की तुलना किसी अन्य संस्था से नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बीकेटीसी कोई फ्रेंचाइजी नहीं है। मैं इस्तीफा देने नहीं, अपनी जिम्मेदारी निभाने आया हूं। श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना मेरी पहली प्राथमिकता है।”
नियुक्ति और नियमितीकरण पर कांग्रेस पर लगाए आरोप
द्विवेदी ने दावा किया कि विवाद में शामिल कर्मचारी की नियमित नियुक्ति वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में शासन ने मंदिर समिति में 34 पद स्वीकृत किए थे, जिनमें इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का पद भी शामिल था। बाद में संबंधित कर्मचारी सहित कई अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमितीकरण के बाद नियमों के विपरीत उच्च वेतनमान और ग्रेड-पे का लाभ भी दिया गया।
“अध्यक्ष नहीं तय करता कर्मचारियों की ड्यूटी”
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए द्विवेदी ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान कर्मचारियों की तैनाती अध्यक्ष नहीं, बल्कि मुख्य कार्याधिकारी द्वारा तैयार किए गए रोस्टर के आधार पर की जाती है। उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी को उनका निजी स्टाफ बताना पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों के विपरीत है।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर भी लगाए गंभीर आरोप
पत्रकार वार्ता के दौरान हेमंत द्विवेदी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय बीकेटीसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मंदिर समिति की निधि का उपयोग अन्य विकास कार्यों में किया गया। उनके अनुसार समिति की धनराशि से विधानसभा क्षेत्र के विकास, चमोली जिले के एक मंदिर तथा टिहरी जिले में सड़क निर्माण जैसे कार्यों के लिए राशि स्वीकृत की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ऐसे बोर्ड की बैठकों में लिए गए, जिनमें अधिनियम के अनुसार आवश्यक कोरम भी पूरा नहीं था।
एफआईआर में देरी और क्लीन चिट के आरोपों पर दी सफाई
एफआईआर दर्ज होने में देरी और संबंधित कर्मचारी को कथित तौर पर क्लीन चिट देने के आरोपों पर द्विवेदी ने कहा कि 3 जुलाई को मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने मुख्य कार्याधिकारी को तत्काल जांच शुरू करने, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी स्तर पर आरोपी कर्मचारी को क्लीन चिट नहीं दी है और सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होगी। यदि पूर्व के कार्यकाल में भी कोई अनियमितता हुई है तो उसकी भी जांच कराई जानी चाहिए।
“चारधाम की व्यवस्था होगी और अधिक पारदर्शी”
द्विवेदी ने कहा कि चारधाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं और मंदिर समिति व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत बने।
गोदियाल को फिर दी खुली बहस की चुनौती
पत्रकार वार्ता के अंत में हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को एक बार फिर सार्वजनिक बहस की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि वह बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को साक्षी मानकर सभी दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बहस की तिथि और समय गणेश गोदियाल तय करें, जबकि स्थान के रूप में उन्होंने बदरीनाथ या केदारनाथ धाम का प्रस्ताव रखा है।
