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⚡ बिजली शेड्यूल में मनमानी पड़ेगी भारी! UERC का नया ड्राफ्ट, अब देना होगा विचलन शुल्क

उत्तराखंड में बिजली उत्पादन और खरीद के तय शेड्यूल से विचलन करने वाली बिजली कंपनियों और संबंधित संस्थानों पर अब आर्थिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने विचलन निपटान तंत्र विनियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।

📍 क्या है नया नियम?

राज्य ग्रिड से जुड़े संस्थानों और राज्य के भीतर बिजली की खरीद-बिक्री करने वाली इकाइयों पर प्रस्तावित नियम लागू होंगे। वास्तविक बिजली उत्पादन या खपत और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) द्वारा तय शेड्यूल में अंतर को डेविएशन माना जाएगा।

💰 डेविएशन पर देना होगा चार्ज

निर्धारित शेड्यूल से अधिक या कम बिजली उत्पादन/खपत होने पर संबंधित खरीदार या विक्रेता को डेविएशन चार्ज का भुगतान करना होगा। इसका उद्देश्य बिजली ग्रिड में संतुलन और अनुशासन बनाए रखना है।

⏰ भुगतान की समयसीमा

SLDC की ओर से स्टेटमेंट जारी होने के 7 दिन के भीतर डेविएशन चार्ज का भुगतान करना होगा। इसके बाद भुगतान में देरी होने पर 9वें दिन से प्रतिदिन 0.04% साधारण ब्याज लगाने का प्रस्ताव है।

🏦 डिफॉल्टरों पर बढ़ेगी सख्ती

पिछले वित्तीय वर्ष में डिफॉल्ट करने वाले खरीदार या विक्रेता को अगले वित्तीय वर्ष में अपनी औसत साप्ताहिक देनदारी के 110% के बराबर Letter of Credit (LC) रखना होगा। भुगतान नहीं होने की स्थिति में SLDC को LC भुनाने का अधिकार होगा।

💡 सरप्लस राशि का भी होगा इस्तेमाल

डेविएशन चार्ज से प्राप्त राशि में महीने के अंत में बचने वाला सरप्लस एक अलग State Power System Development Fund में जमा किया जाएगा। इस राशि का इस्तेमाल बिजली व्यवस्था के विकास और मजबूती से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।

🎯 नियमों का मुख्य उद्देश्य

इस प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद बिजली उत्पादन और खपत के बीच संतुलन बनाए रखना, ग्रिड अनुशासन और सुरक्षा मजबूत करना तथा तय शेड्यूल के अनुसार बिजली संचालन को बढ़ावा देना है।

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