उत्तराखंड में नशे का जाल गहराया, पछवादून में 12 साल का नाबालिग स्मैक के साथ पकड़ा गया

विकासनगर के पछवादून क्षेत्र में सूखे नशे की तस्करी का तरीका लगातार बदलता जा रहा है। पहले जहां महिलाएं इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाई जाती थीं, अब तस्कर बच्चों और किशोरों को आगे कर स्मैक, चरस और गांजा जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी व बिक्री करा रहे हैं। हाल ही में क्षेत्र में एक नाबालिग के पास से स्मैक बरामद होने के बाद यह गंभीर मामला फिर से चर्चा में आ गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पछवादून क्षेत्र में बच्चों और किशोरों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार पुलिस औपचारिक कार्रवाई कर नशीले पदार्थों को मौके पर ही नष्ट कर मामला रफा-दफा कर देती है, जिससे तस्करों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
कुंजाग्रांट क्षेत्र को नशा तस्करी और बिक्री का बड़ा केंद्र माना जाने लगा है। यहां से नशीले पदार्थों की आपूर्ति केवल पछवादून तक सीमित नहीं है, बल्कि देहरादून और हरिद्वार तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है। अधिकांश मामलों में स्मैक, चरस और गांजा जैसी खेप उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के मिर्जापुर थाना क्षेत्र से पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही है।
शुरुआत में इस अवैध धंधे में युवा कम समय में अधिक पैसा कमाने के लालच में जुड़े थे। इसके बाद महिलाएं भी नशा तस्करी के कारोबार का हिस्सा बनने लगीं। अब बच्चों और किशोरों को इस काले कारोबार में झोंकने के मामले सामने आने से पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया है। हाल ही में स्थानीय ग्राम प्रधानों और आम लोगों की सजगता से बच्चों और किशोरों के माध्यम से नशा तस्करी कराए जाने का यह मामला उजागर हुआ है, जिससे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं।
