यूटीयू पेपर लीक कांड! गुमनाम ई-मेल से हुआ बड़ा खुलासा, दो परीक्षाएं रद्द

देहरादून: वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में प्रश्नपत्र लीक का मामला एक गुमनाम ई-मेल के जरिए सामने आने से विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यदि यह शिकायत विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंचती, तो संभवतः पूरा मामला दबा रह जाता और परीक्षाएं सामान्य रूप से मान ली जातीं।
जानकारी के अनुसार, 8 जुलाई को आयोजित ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ विषय की परीक्षा के बाद विश्वविद्यालय को एक गुमनाम ई-मेल प्राप्त हुआ। ई-मेल में आरोप लगाया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षक ने 3 जुलाई की रात छात्रों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में ‘इंपॉर्टेंट क्वेश्चन’ साझा किए थे। शिकायत में दावा किया गया कि इन प्रश्नों और परीक्षा में पूछे गए सवालों में काफी समानता थी, जिससे पेपर लीक की आशंका गहरा गई।
शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर विश्वविद्यालय ने संबंधित परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने के बाद दो परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक पेपर तक सीमित नहीं हो सकता। विश्वविद्यालय अब यह भी जांच कर रहा है कि कहीं प्रश्नपत्रों की गोपनीयता से जुड़ी प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
यह घटना विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली, गोपनीयता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एक गुमनाम ई-मेल के भरोसे इतनी बड़ी अनियमितता उजागर हो सकती है, तो परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और नई परीक्षा तिथियों की घोषणा की जाएगी।
