पहली बारिश में ही बिखरने लगा दून-पांवटा फोरलेन: जगह-जगह दरारें, गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

एक मानसून भी नहीं झेल पाया करोड़ों की लागत से बना फोरलेन, बारिश में पैचवर्क से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे सवाल
देहरादून को हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं धार्मिक शहर पांवटा साहिब से जोड़ने वाला नवनिर्मित बल्लूपुर-दून-पांवटा फोरलेन पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस फोरलेन पर मानसून शुरू होते ही जगह-जगह दरारें दिखाई देने लगी हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़क बनने के कुछ ही समय बाद वर्षाकाल के दौरान ही पैचवर्क कराना पड़ रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
📌 पहली बारिश में खुली निर्माण की पोल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नई सड़क से बेहतर और सुरक्षित सफर की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क की सतह पर कई स्थानों पर दरारें उभर आई हैं। कई जगह सड़क टूटने लगी है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सड़क पर शुरुआती महीनों में इस प्रकार की दरारें दिखाई देना घटिया निर्माण सामग्री, कमजोर बेस लेयर, जल निकासी की कमी या तकनीकी लापरवाही का संकेत हो सकता है।
🚧 बारिश में पैचवर्क पर भी सवाल
सड़क पर उभरी दरारों को भरने के लिए वर्षाकाल के दौरान ही पैचवर्क कराया जा रहा है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बारिश या अधिक नमी के दौरान डामर (Bitumen) का कार्य करना मानकों के अनुरूप नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में किया गया पैचवर्क कुछ ही दिनों में उखड़ सकता है, जिससे सड़क और अधिक क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है।
⚠️ हादसों का बढ़ता ग्राफ
फोरलेन बनने के बाद कुल्हाल से लेकर शेरपुर तक दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर लगभग रोजाना छोटे-बड़े सड़क हादसे हो रहे हैं।
इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—
- मुख्य हाईवे और संपर्क मार्गों पर ट्रैफिक सिग्नलों का अभाव
- कैट-आई (ब्लिंकर्स) नहीं लगाए गए
- सड़क के कई कट (U-Turn/Opening) असुरक्षित और जानलेवा
- वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स या अन्य सुरक्षा उपायों का अभाव
- कई स्थानों पर सड़क का ज्यामितीय डिजाइन (Geometric Design) मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई देता
🗣️ लोगों में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की गुणवत्ता अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। लोगों ने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग से पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और सड़क सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
यदि समय रहते सड़क की खामियों को दूर नहीं किया गया, तो आगामी मानसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
