झारखंड

21वीं सदी में भी ऐसी सोच! बेटी पैदा हुई तो झोले में भरकर फेंकने पहुंचे दंपती, मंदिर के पास ग्रामीणों ने दबोचा 

नवजात बच्ची को मंदिर के पास संदिग्ध परिस्थितियों में छोड़ने का मामला, ग्रामीणों की सतर्कता से बची मासूम की जान; पुलिस जांच में जुटी।

समाज में आज भी बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की सोच खत्म नहीं हो पाई है। बेटियां जहां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, वहीं दूसरी ओर नवजात बच्चियों के साथ अमानवीय व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक घटना झारखंड के पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के मनहूं गांव से सामने आई है, जहां एक नवजात बच्ची को झोले में लेकर मंदिर के पास संदिग्ध परिस्थितियों में छोड़ने का मामला सामने आया।

मंदिर के पास बच्ची को छोड़कर पूजा की तैयारी कर रही थीं महिलाएं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे की बताई जा रही है। लगातार बारिश के कारण इलाके में खेतों में पानी भरा हुआ था। इसी दौरान कुछ युवक खेतों में मछली पकड़ रहे थे। उनकी नजर मंदिर के पास मौजूद तीन महिलाओं पर पड़ी, जिनकी गतिविधियां उन्हें संदिग्ध लगीं।

बताया गया कि महिलाएं एक झोले में नवजात बच्ची को लेकर वहां पहुंची थीं। इसके बाद बच्ची को खेत की मेड़ पर रख दिया गया और झोले से सिंदूर, टिकली, कंघी समेत पूजा-पाठ का सामान निकाला जाने लगा। बारिश और ठंड के बीच बच्ची को बिना पर्याप्त कपड़ों के पड़ा देखकर युवकों ने शोर मचा दिया।

दो महिलाएं मौके से फरार, एक को ग्रामीणों ने पकड़ा

ग्रामीणों के शोर मचाने पर दो महिलाएं मौके से भाग गईं, जबकि एक महिला को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। उसकी पहचान मंजू देवी के रूप में बताई गई है, जो छतरपुर नगर पंचायत के मंदेया गांव के भल्ही टोला की रहने वाली हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बच्ची को जन्म भी उसी महिला ने दिया था।

महिला के पास से पूजा सामग्री मिलने के बाद ग्रामीणों को बच्ची को लेकर किसी अनहोनी की आशंका हुई। हालांकि, बच्ची को मंदिर के पास छोड़ने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अस्पताल में भर्ती कराई गई नवजात

ग्रामीणों ने तत्काल बच्ची को उठाकर गर्म कपड़ों में लपेटा और अस्पताल पहुंचाया। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची की हालत गंभीर होने के कारण उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा था।

पहले से हैं चार बच्चे

ग्रामीणों के मुताबिक, मंजू देवी के परिवार में पहले से दो बेटे और दो बेटियां हैं। नवजात बच्ची उनकी पांचवीं संतान बताई जा रही है। इस मामले में दो अन्य महिलाओं की पहचान और उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। बच्ची को मंदिर के पास ले जाने का उद्देश्य क्या था और इस घटना में अन्य महिलाओं की क्या भूमिका थी, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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