उत्तराखंड

QR कोड प्रकरण: अदालत का हवाला देकर सूचना के अधिकार से बचना संभव नहीं

बदरी-केदार धाम क्यूआर कोड प्रकरण की सुनवाई में उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी मामले का अदालत में लंबित होना, सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से बचने का आधार नहीं बन सकता। आयोग ने कहा कि केवल न्यायालय से जुड़े होने का तर्क देकर सूचना रोके जाना कानून की भावना के विपरीत है।

सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त कुशला नंद ने कहा कि यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो विभाग सिर्फ “मामला कोर्ट में है” कहकर सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना तभी रोकी जा सकती है, जब न्यायालय द्वारा उस पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया हो या जानकारी सार्वजनिक करने से जांच या अभियोजन की प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना हो।

आयोग ने मामले में बदरीनाथ कोतवाली के लोक सूचना अधिकारी को चेतावनी जारी करते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में न्यायालय का हवाला देकर आरटीआई आवेदनों को अस्वीकार न किया जाए। यह निर्देश बदरी-केदार धाम से जुड़े क्यूआर कोड विवाद की सुनवाई के दौरान दिया गया।

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