दिल्ली में कब होगी कृत्रिम वर्षा? प्रदूषण से निपटने की तैयारी में रेखा सरकार; क्लाउड सीडिंग के हुए दो ट्रायल
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सरकार अब कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी में जुट गई है। राजधानी की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार प्रदूषण से अस्थायी राहत दिलाने के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक का सहारा लेने पर विचार कर रही है।
पिछले 15 दिनों में दो ट्रायल किए गए
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने पिछले करीब 15 दिनों में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल किए हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य मौसम की परिस्थितियों का आकलन करना और यह समझना था कि कृत्रिम बारिश कराने के लिए वातावरण कितना अनुकूल है।
सरकार अब दिवाली और छठ पूजा के बाद एक बार फिर इस तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में दो से तीन संभावित तारीखों पर कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी हो सकती है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। Delhi News – The Indian Express+2
कब होगी दिल्ली में कृत्रिम बारिश?
फिलहाल दिल्लीवासियों को कृत्रिम बारिश के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार दिवाली और छठ पूजा के बाद मौसम की अनुकूलता को देखते हुए आगे की कार्रवाई कर सकती है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है।
क्लाउड सीडिंग तभी प्रभावी हो सकती है, जब आसमान में पर्याप्त नमी वाले उपयुक्त बादल मौजूद हों। इसलिए केवल विमान से रसायनों का छिड़काव करने से बारिश की गारंटी नहीं होती।
क्या होती है क्लाउड सीडिंग तकनीक?
क्लाउड सीडिंग कृत्रिम बारिश कराने की एक वैज्ञानिक तकनीक है। इसमें विशेष विमानों की मदद से बादलों में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का छिड़काव किया जाता है।
ये पदार्थ बादलों में मौजूद नमी को पानी की बूंदों या बर्फ के क्रिस्टल में बदलने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं। जब बूंदें बड़ी और भारी हो जाती हैं, तो बारिश होने की संभावना बनती है।
क्या प्रदूषण से मिलेगी राहत?
बारिश होने पर वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषण के कुछ कण नीचे जमीन पर आ सकते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता में अस्थायी सुधार हो सकता है। हालांकि, इसका असर मौसम, हवा की गति, बादलों में नमी और प्रदूषण के स्तर पर निर्भर करता है।
दिल्ली सरकार ने इससे पहले भी अक्टूबर 2025 में IIT कानपुर के सहयोग से क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल कराए थे, लेकिन उस समय पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कृत्रिम बारिश नहीं हो सकी थी। India News+2
फिलहाल आधिकारिक तारीख का इंतजार
दिल्ली में इस बार प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश को एक संभावित आपातकालीन उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कृत्रिम बारिश किस दिन कराई जाएगी। अंतिम फैसला मौसम और बादलों की अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा।
इसलिए फिलहाल दिल्लीवासियों को कृत्रिम बारिश की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
