दो साल से तबादले का इंतजार, 572 शिक्षकों के मामलों पर बढ़ा दबाव

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षकों के 572 लंबित स्थानांतरण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण की मांग अब तेज हो गई है। शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से अपील की है कि स्थानांतरण अधिनियम की धारा-27 के तहत शासन स्तर पर लंबित मामलों का बिना किसी और देरी के निस्तारण करते हुए स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन सभी 572 मामलों को शासन के पास भेजने से पहले विभागीय स्तर पर आवश्यक जांच, परीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसके बाद ही अंतिम सूची अनुमोदन के लिए शासन को भेजी गई थी। ऐसे में अब इन मामलों को लंबित रखना उचित नहीं है।
संगठनों का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार नियुक्ति प्राधिकारी स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन कर आगे की कार्रवाई की जानी है। इसलिए संबंधित विभागों को तत्काल समितियों का गठन कर लंबित प्रकरणों का निस्तारण करते हुए स्थानांतरण आदेश जारी करने चाहिए।
शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि स्थानांतरण अधिनियम में अनुरोध आधारित तबादलों का स्पष्ट प्रावधान है। लंबे समय से पात्र शिक्षक अपने स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और समयबद्ध निर्णय न होने से उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा कि लगभग दो वर्षों से धारा-27 के तहत कई शिक्षक स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं। अब शिक्षकों को नई समितियों के गठन की नहीं, बल्कि सीधे स्थानांतरण आदेश जारी होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि स्थानांतरण शिक्षकों का अधिकार है और इसमें अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
वहीं एससीईआरटी शाखा के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. अंकित जोशी ने कहा कि जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्थानांतरण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जानी चाहिए। इससे शिक्षकों को वर्तमान सत्र में स्थानांतरण का वास्तविक लाभ मिलेगा और विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं भी समय पर सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि लंबित 572 स्थानांतरण प्रकरणों का जल्द निस्तारण कर शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए, ताकि नए शैक्षणिक सत्र से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी हो सकें।
