“महाकुंभ मेला: दो महीनों में 375.99 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह, राज्य के खजाने में आई राहत”

प्रयागराज, 8 मार्च 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला ने राज्य सरकार के खजाने को बड़ी राहत दी है। महाकुंभ मेला, जो हर बार लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है, इस बार भी आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हुआ है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, महाकुंभ मेला क्षेत्र से केवल दो महीने में 375.99 करोड़ रुपये का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) संग्रह हुआ है, जो राज्य के राजस्व के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है।महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक घटना भी है। हर बार की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं ने मेला क्षेत्र में पहुंचकर स्नान, पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। इसके अलावा, मेले के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय व्यवसायों, होटलों, दुकानदारों, परिवहन सेवाओं और खाद्य आपूर्ति के कारोबार में तेजी आई, जिससे राज्य को जीएसटी के रूप में भारी राजस्व प्राप्त हुआ है।इस वर्ष महाकुंभ मेले में भव्यता और सुरक्षा के साथ-साथ समुचित सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि जीएसटी संग्रह की यह राशि मेले के दौरान उपभोग, होटल सेवाओं, परिवहन, रिटेल और अन्य व्यवसायों से उत्पन्न हुई है।राज्य के वित्त मंत्री ने इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “महाकुंभ मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस मेले ने राज्य को बड़ा जीएसटी संग्रह दिया है, जो विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।”महाकुंभ मेला को लेकर स्थानीय व्यापारियों, होटलों के मालिकों और विभिन्न सेवा प्रदाताओं में भी उत्साह देखा गया है। मेले के दौरान उनकी बिक्री में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, और साथ ही सरकारी टैक्स संग्रहण में भी इजाफा हुआ है।आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि महाकुंभ मेला राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है। प्रत्येक आयोजन के साथ राज्य को एक नई दिशा में प्रगति मिलती है, और यह जीएसटी संग्रह की भारी राशि इसके प्रमाण के रूप में सामने आई है।अधिकारियों के अनुसार, महाकुंभ मेला अब एक स्थायी और महत्वपूर्ण आर्थिक स्रोत बन चुका है, जो राज्य को न केवल पर्यटन से जुड़े राजस्व प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों को भी सशक्त करता है। इस सफलता से राज्य सरकार के योजनाओं के कार्यान्वयन में भी मदद मिलेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के विकास को और गति मिलेगी।

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