
नई दिल्ली: संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस खारिज कर दिया गया है। यह नोटिस कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने उठाया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि शाह ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के बारे में एक असंवेदनशील टिप्पणी की थी। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने शाह पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन संसद के अध्यक्ष ने इसे खारिज कर दिया, जिससे विपक्षी नेताओं में नाराजगी का माहौल है। यह मामला तब सामने आया जब अमित शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सोनिया गांधी को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे कांग्रेस ने अपमानजनक और महिला विरोधी बताया। कांग्रेस के नेताओं का कहना था कि गृह मंत्री का बयान न केवल सोनिया गांधी के प्रति अवमानना था, बल्कि यह पूरे महिला समुदाय का अपमान करने वाला था। पार्टी ने इस बयान के खिलाफ संसद में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल किया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार करने के बजाय खारिज कर दिया। स्पीकर के इस फैसले के बाद कांग्रेस के नेताओं ने विरोध जताया और इसे सरकार द्वारा विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश के रूप में देखा। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “यह कदम लोकतंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। जब एक प्रमुख नेता को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है और उसे उचित न्याय नहीं मिलता, तो यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।” हालांकि, सरकार ने इस मामले में अपनी सफाई दी और कहा कि शाह का बयान किसी भी व्यक्तिगत हमले का हिस्सा नहीं था। सरकार का कहना था कि यह एक सामान्य राजनीतिक बयान था और इसे किसी भी तरह से महिलाओं के खिलाफ या सोनिया गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत अपमान के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस मामले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। कांग्रेस के अलावा, अन्य विपक्षी दलों ने भी शाह के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया और कहा कि सरकार द्वारा इस तरह के बयानों को बढ़ावा देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। हालांकि, इस मुद्दे ने संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया और इसे लेकर आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि यह सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है, जो विपक्ष को कमजोर करने के लिए इस तरह के विवादों का सहारा ले रही है। स्पीकर के फैसले के बाद यह देखना होगा कि क्या यह मामला राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ता है या फिर धीरे-धीरे शांत हो जाता है। इसके साथ ही, सोनिया गांधी पर की गई टिप्पणी और इसके परिणामस्वरूप उठने वाले सवाल आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ ला सकते हैं।