
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन व्यवस्था पर हुए खर्च को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जो पूरे मामले की जांच कर तीन सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर एक पत्र वायरल हुआ था, जिसमें केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों, अति विशिष्ट अतिथियों और सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों एवं जवानों के ठहरने और भोजन व्यवस्था पर हुए खर्च के भुगतान के लिए करीब छह लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत करने का मामला सामने आया। पत्र में बताया गया कि 30 अप्रैल 2025 से शुरू हुई यात्रा अवधि के दौरान कई अतिथियों को जीएमवीएन और स्थानीय गेस्ट हाउसों में ठहराया गया था, जिसका भुगतान लंबित चल रहा था।
मामला सामने आने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के पैसे का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों सहित विस्तृत रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाए। समिति गठन के आदेश मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ द्वारा जारी किए गए हैं।
फाइनेंस कंट्रोलर की मंजूरी पर उठे सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि छह लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति आखिर बिना फाइनेंस कंट्रोलर की अनुमति के कैसे दे दी गई। जानकारी के अनुसार, व्यवस्थापक की ओर से अतिरिक्त बजट की मांग रखी गई थी, जिसे तत्कालीन सीईओ ने मंजूरी दे दी। जबकि बीकेटीसी नियमों के अनुसार इतनी बड़ी वित्तीय स्वीकृति फाइनेंस कंट्रोलर की सहमति के बिना नहीं दी जा सकती।
अब मंदिर समिति इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई है। बीकेटीसी का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे और जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि मामला सीधे मंदिरों में आने वाले दान और उसके उपयोग से जुड़ा है।