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उत्तराखंड में धार्मिक शिक्षा को लेकर नया नियम लागू: स्कूल-मदरसों में वैकल्पिक होगा पाठ्यक्रम, जबरन पढ़ाने पर रोक

उत्तराखंड सरकार के अधीन उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने धार्मिक शिक्षा को लेकर नया पाठ्यक्रम लागू कर दिया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के स्कूल-मदरसों में अब केवल प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा। साथ ही किसी भी छात्र को धार्मिक शिक्षा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक शिक्षा पूरी तरह स्वैच्छिक (Optional) होगी और इसे नियमित शैक्षणिक समय के दौरान नहीं पढ़ाया जाएगा। इसके लिए स्कूल शुरू होने से पहले या छुट्टी के बाद अलग समय निर्धारित किया जाएगा, ताकि छात्रों की सामान्य पढ़ाई प्रभावित न हो।

📌 नई व्यवस्था की 5 प्रमुख बातें:

✅ 1. केवल स्वीकृत पाठ्यक्रम लागू
स्कूल-मदरसों में केवल उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा।

✅ 2. जबरन धार्मिक शिक्षा पर पूरी तरह रोक
किसी भी छात्र को धार्मिक पाठ्यक्रम पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। यह पूरी तरह छात्र और अभिभावकों की इच्छा पर निर्भर होगा।

✅ 3. नियमित कक्षाओं से अलग समय
धार्मिक शिक्षा स्कूल के नियमित शिक्षण समय में नहीं होगी। इसे स्कूल शुरू होने से पहले या छुट्टी के बाद संचालित किया जाएगा।

✅ 4. नियमित निरीक्षण होगा
प्राधिकरण की टीम समय-समय पर स्कूल-मदरसों का भौतिक निरीक्षण करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी नियमों का पालन हो रहा है।

✅ 5. नियमों का नोटिस अनिवार्य
हर स्कूल-मदरसे में धार्मिक शिक्षा से जुड़े दिशा-निर्देशों का नोटिस प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि छात्र और अभिभावक नियमों से अवगत रह सकें।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा को पारदर्शी, व्यवस्थित और स्वैच्छिक बनाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र पर धार्मिक शिक्षा लेने का दबाव न बनाया जाए।

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