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हर मानसून में क्यों टूट जाती हैं उत्तराखंड की सड़कें? 1,561 सड़कें क्षतिग्रस्त, मरम्मत पर ₹122 करोड़ का अनुमान

हर मानसून में क्यों टूट जाती हैं उत्तराखंड की सड़कें? 1,561 सड़कें क्षतिग्रस्त, मरम्मत पर ₹122 करोड़ का अनुमानइस साल भी भारी बारिश और भूस्खलन के चलते 1,561 सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इनमें पौड़ी जिले की 317 सड़कें और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की 571 सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। सड़कों की मरम्मत पर करीब ₹122 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

विशेषज्ञों के अनुसार समस्या सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि कमजोर सड़क निर्माण, खराब जल निकासी व्यवस्था और ढलानों के स्थायी उपचार की कमी भी है। जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश इस संकट को और बढ़ा रही है।

हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों में रॉक बोल्टिंग, स्टील वायर मेश, शॉटक्रीट, बायो-इंजीनियरिंग और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें अधिक सुरक्षित बनी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च से मई के बीच प्री-मानसून ट्रीटमेंट, नालियों की सफाई, ढलानों का निरीक्षण और कमजोर रिटेनिंग वॉल की मरम्मत समय रहते कर दी जाए तो मानसून के दौरान सड़कें बंद होने की घटनाओं में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

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