चंडीगढ़ :पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) को केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) बनाने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा

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पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) को केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) बनाने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बीते 19 मई को हाईकोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हक की लड़ाई लड़ रहे विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के इस आदेश पर खुशी जताई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को अगली सुनवाई 30 अगस्त 2022 से पहले हाईकोर्ट में जवाब देना होगा।

गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट में डॉ. संगीता भल्ला बनाम पंजाब राज्य और अन्य केस में पंजाब विश्वविद्यालय के अधिकार को लेकर लंबी बहस हुई है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का विशेष रूप से नियंत्रित, विनियमित और शासित विश्वविद्यालय है। अंतर्राज्यीय निकाय के रूप में विश्वविद्यालय का चरित्र पहले से ही समाप्त हो चुका है। चंडीगढ़ की भागीदारी मात्र से इसे अंतरराज्यीय निकाय नहीं बनाया जा सकता।

विश्वविद्यालय में अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सुधार किया जाना चाहिए। अदालत ने शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय और उसके संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की शिकायतों का समाधान करने की बात अपने निर्देशों में कही है। अदालत ने माना है कि सभी अस्पष्टताओं को दूर करने और विश्वविद्यालय के मामलों से संबंधित सभी क्षेत्रों में व्याप्त भ्रम को दूर करने के लिए इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप से परिवर्तित करने पर विचार करना होगा।

गुप्ता ने कहा, उनकी लंबे समय से मांग रही है कि पीयू में पंचकूला समेत हरियाणा के निकटवर्ती जिलों के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को पंजाब की तर्ज पर दाखिले में कोटा मिले। बीते 6 मई को वह उपराष्ट्रपति एवं पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति एम. वेंकैया नायडू के समक्ष चंडीगढ़ में इस मुद्दे को उठा चुके हैं।

उनका कहना है कि पंचकूला जिले के कॉलेजों को इस विश्वविद्यालय के साथ जोड़ने से बच्चों को 85 फीसदी कोटे के तहत दाखिला मिल सकेगा। हरियाणा-पंजाब के बंटवारे के वक्त भी विश्वविद्यालय में दोनों प्रदेशों को 40:60 का हिस्सा देने का प्रावधान हुआ था इसलिए 100 किलोमीटर तक के दायरे में आने वाले अंबाला और यमुनानगर के कॉलेजों को भी विश्वविद्यालय के साथ जोड़ने पर विचार करना चाहिए।

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