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Uttarkashi Tunnel Rescue: सिल्क्यारा घटना के बाद टनल SOP की कवायद तेज - The Indian Exposure

Uttarkashi Tunnel Rescue: सिल्क्यारा घटना के बाद टनल SOP की कवायद तेज

हिमालयी राज्य उत्तराखंड में सड़क और रेलवे के आधारभूत ढांचे का निर्माण तेजी से हो रहा है। सड़क व रेलवे लाइन के लिए सुरंग का जाल बिछ रहा है। परंतु, अभी तक राज्य में सुरंग निर्माण में सुरक्षा और सुरंग के ढहने जैसी घटनाओं में खोज बचाव अभियान के लिए सेफ्टी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार नहीं है।

भले ही सिलक्यारा सुरंग घटना के बाद एसओपी को लेकर अब उत्तराखंड शासन स्तर पर कवायद शुरू हुई है। उत्तराखंड शासन में आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा कहते हैं कि सिलक्यारा घटना के सभी पहलुओं का पूरा अध्ययन किया जा रहा है। निर्माण के दौरान सुरक्षा से लेकर खोज बचाव की बारीकियों को भी देखा जा रहा है। सुरंग निर्माण में सुरक्षा मानकों में क्या होना चाहिए। यह रिपोर्ट भविष्य के लिए अच्छी होगी। सिलक्यारा सुरंग में सुरक्षा मानक क्या थे, इसको लेकर एनएचआइडीसीएल के अधिकारी ही जानकारी दे सकेंगे।

सिलक्यारा सुरंग में 12 नवंबर को हुई घटना सुरंग निर्माण करवाने वाले विभागों और निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा सबक है। सिलक्यारा सुरंग में 17 दिनों तक चले खोज बचाओ अभियान में देश विदेश की विभिन्न एजेंसियां युद्ध स्तर पर जुटी रही। अपनी ओर से सभी ने 41 श्रमिकों को बचाने के लिए प्रयास किया। परंतु खोज बचाव अभियान के दौरान कुछ कमियां भी सामने आई। सिलक्यारा खोज बचाओ अभियान में नेतृत्व को लेकर भी करीब आठ दिनों तक बड़ी असमंजस की स्थिति रही।

पीएमओ की दखल के बाद अभियान में कुछ स्थिति सुधरी। अगर एसओपी बनी होती तो अभियान को लीड करने, विशेषज्ञों से समन्वय स्थापित करने में गतिरोध की स्थिति न बनती। दूसरी खामी यह रही कि कार्यदायी संस्था और निर्माण कंपनी के पास सुरंग में सुरक्षा व ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई भी योजना नहीं थी। यहां तक कंपनी के पास श्रमिकों की सही संख्या, श्रमिकों का बायोडाटा भी कंपनी के पास भी उपलब्ध नहीं था। जब सिलक्यारा की घटना हुई थी तो 12 नवंबर से लेकर 16 नवंबर तक कंपनी श्रमिकों की संख्या 40 बताती रही। जबकि 17 नंवबर को श्रमिकों की संख्या 41 बतायी गई।

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