
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी गैस से लदा भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। मौजूदा परिस्थितियों में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया था।
जानकारी के अनुसार यह एलपीजी टैंकर रविवार शाम करीब पांच बजे मुंद्रा पोर्ट पहुंचा। जहाज अपने साथ लगभग 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है। इस गैस को अब भारत के घरेलू वितरण नेटवर्क में भेजा जाएगा ताकि देश में गैस की आपूर्ति सुचारु बनी रहे। ‘शिवालिक’ एक विशाल गैस वाहक जहाज है, जिसका संचालन शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है। यह जहाज फारस की खाड़ी से अरब सागर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी समुद्री रास्ते से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है।
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद ईरान ने भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी। जानकारी के मुताबिक ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के दो एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की इजाजत दी गई थी। दोनों जहाज करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना हुए थे और सफलतापूर्वक इस मार्ग को पार कर चुके हैं।
भारत में घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में इन जहाजों का समय पर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंद्रा पोर्ट पहुंचने के बाद ‘शिवालिक’ से गैस उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और इसे देश के एलपीजी वितरण नेटवर्क में भेजा जाएगा। वहीं दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ के 17 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे देश की गैस आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी।