
उच्च हिमालयी ठंड यात्रियों पर पड़ रही भारी
उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा में इस बार मैदानी राज्यों से आने वाले हजारों श्रद्धालु स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप के चिकित्सा केंद्र के अनुसार अब तक 8,800 से अधिक यात्री उपचार के लिए पहुंच चुके हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि मैदानी इलाकों के लोग अचानक उच्च हिमालयी क्षेत्रों के कम तापमान और कठिन मौसम के अनुसार स्वयं को ढाल नहीं पा रहे हैं। इसके कारण यात्रियों में सर्दी-जुकाम, कफ, सांस लेने में दिक्कत, शरीर दर्द और पैरों में सूजन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेष रूप से अस्थमा के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
बिना आराम लगातार यात्रा बन रही बीमारी की वजह
चिकित्सा केंद्र के प्रभारी डॉ. विजय गौर के अनुसार, कई यात्री बिना पर्याप्त तैयारी के यात्रा पर निकल रहे हैं।
अधिकांश श्रद्धालु पर्याप्त गर्म कपड़े, बरसाती, दवाइयां और ट्रेकिंग के जरूरी सामान साथ नहीं ला रहे।
इसके अलावा कई यात्री एक धाम से दूसरे धाम तक लगातार यात्रा कर रहे हैं और शरीर को आराम नहीं दे रहे। डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार यात्रा और थकान के कारण शरीर कमजोर पड़ जाता है, जिससे ठंड और ऊंचाई का असर तेजी से होने लगता है।
अस्थमा और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी जरूरी
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित यात्रियों की स्थिति अधिक खराब हो सकती है।
डॉक्टरों ने ऐसे यात्रियों को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच कराने और जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखने की सलाह दी है।
यात्रा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
डॉक्टरों द्वारा बताए गए जरूरी उपाय:
- गर्म कपड़े, जैकेट, टोपी, मोजे और बरसाती जरूर साथ रखें।
- एक धाम की यात्रा के बाद पर्याप्त विश्राम करें।
- पैदल ट्रेक के दौरान धीरे-धीरे चलें और गहरी सांस लेने से बचें।
- गर्म पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
- स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
- ट्रेकिंग के दौरान मजबूत जूते पहनें, हवाई चप्पल से बचें।
- कान और सिर को ढककर रखें ताकि ठंडी हवा का असर कम हो।
हवाई चप्पल पहनकर यात्रा कर रहे श्रद्धालु
डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और हरियाणा जैसे राज्यों से आने वाले कई ग्रामीण यात्री लंबी पैदल यात्रा हवाई चप्पलों में ही कर रहे हैं।
इससे यात्रियों को चोट लगने, पैरों में सूजन आने और ठंड लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा है कि चारधाम यात्रा में अच्छे ट्रेकिंग शूज़ पहनना बेहद जरूरी है।
सुरक्षित यात्रा के लिए तैयारी है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि शारीरिक सहनशक्ति की भी परीक्षा है। सही तैयारी, पर्याप्त आराम और मौसम के अनुसार सावधानी बरतकर ही यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।