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उत्तराखंड में जंगल धधक रहे… और वन अफसर कर रहे जनगणना!🌲 भीषण आग के बीच NGT का सरकार पर बड़ा सवाल

उत्तराखंड के जंगल इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। पहाड़ों में बढ़ती गर्मी और लगातार लग रही आग ने पर्यावरणीय संकट को और गहरा कर दिया है। हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं, वन्यजीवों का जीवन खतरे में है और पहाड़ी इलाकों की जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ रहा है।

लेकिन इस गंभीर स्थिति के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जिन वन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी जंगलों को आग से बचाने की है, उन्हें जनगणना जैसे गैर-वन कार्यों में लगा दिया गया। अब इस मामले पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है।

एनजीटी की प्रधान पीठ ने उत्तराखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) से जवाब मांगा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वन अधिकारियों को गैर-वन कार्यों में क्यों लगाया गया? अदालत ने यह भी पूछा कि जब राज्य जंगलों की भीषण आग से जूझ रहा है, तब वन विभाग का अमला अपने मूल कार्यों से दूर क्यों किया गया।

यह मामला दीपिका खारी बनाम पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एवं अन्य से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और ऐसे समय में वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी जंगलों और पर्यावरण की सुरक्षा होनी चाहिए।

मामले में वन अधिकारियों की तैनाती और जनगणना ड्यूटी से जुड़े मुद्दे पर अगली सुनवाई 26 मई को होगी, जबकि अन्य संबंधित पहलुओं पर सुनवाई 8 जुलाई को तय की गई है।

उत्तराखंड में हर साल गर्मियों में जंगलों में आग बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर सिर्फ पर्यावरण ही नहीं बल्कि जल स्रोतों, वन्यजीवों और स्थानीय लोगों के जीवन पर भी गंभीर रूप से पड़ेगा।

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