
उत्तरकाशी: दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर निवासी बबीता पांडे का 28 दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। हालांकि, पुलिस और बचाव एजेंसियों ने सर्च ऑपरेशन बंद नहीं किया है। संयुक्त टीमें लगातार दुर्गम जंगलों, गुफाओं और भालुओं के संभावित ठिकानों में बबीता की तलाश में जुटी हुई हैं।
बबीता पांडे, जो एमबीए की छात्रा हैं और नैनीताल जिले के रामनगर के ग्राम चिल्किया की रहने वाली हैं, 29 मई को दयारा बुग्याल ट्रेक के गोई पड़ाव से रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थीं। घटना के बाद से ही उनकी तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।
बबीता की खोज में पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग, एसओजी, आपदा प्रबंधन विभाग की क्यूआरटी, सेना और आईटीबीपी की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। इलाके का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण भी कराया गया, जबकि गोई पड़ाव स्थित झील की दो बार गहन तलाशी ली जा चुकी है। इसके बावजूद बबीता का कोई सुराग नहीं मिल सका।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दयारा बुग्याल के आसपास का जंगल अत्यंत विस्तृत और दुर्गम है। इसी कारण नियमित अंतराल पर संयुक्त टीमें रैथल, बार्सू और नटीण गांवों से दयारा जाने वाले ट्रेक मार्गों, घने जंगलों, काली गुफाओं और भालुओं के संभावित ठिकानों में लगातार खोजबीन कर रही हैं।
सिर्फ पहाड़ी इलाकों में ही नहीं, बल्कि पुलिस की अलग-अलग टीमें ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून समेत मैदानी क्षेत्रों में भी बबीता से जुड़े हर संभावित सुराग की जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिलती, तब तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।
करीब एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बबीता पांडे का कोई पता न चलना अब एक गहरी रहस्य बन चुका है। परिवार अब भी उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि प्रशासन और बचाव दल हर संभव प्रयास में जुटे हुए हैं।