
भूस्खलन से प्रभावित जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वीरवार को तीसरे दिन भी यातायात बहाल नहीं किया जा सका। हाईवे पर मलबा के साथ आए पत्थरों को विस्फोटक लगाकर तोड़ा गया, परंतु अभी भी काम जारी है। हाईवे पर 1300 से अधिक छोटे-बड़े वाहन फंसे हुए हैं। वहीं, भारतीय सेना और पुलिस ने बर्फबारी के कारण राजौरी में पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला के ऊंचे इलाकों में फंसे कई आदिवासी लोगों को बचाया।
राजमार्ग पर फंसे वाहनों को निकालने की प्राथमिकता
अधिकारियों ने बताया कि वीरवार को मौसम में सुधार के साथ सुबह से ही उधमपुर और रामबन जिलों में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर मलबा हटाने का काम सुबह ही तेज कर दिया गया। राजमार्ग पर फंसे वाहनों को निकालने की प्राथमिकता दी जा रही है।
चट्टान को हटाने के लिए विस्फोटकों का प्रयोग
आवश्यक वस्तुओं से लदे पंथियाल और बनिहाल के बीच फंसे 700 से अधिक वाहनों को कश्मीर घाटी के लिए निकाला गया है। राजमार्ग पर फंसे शेष 1300 वाहनों को हटाने के प्रयास जारी हैं। उधमपुर जिले के समरोली के पास देवाल पुल पर सड़क के बीच से एक भारी चट्टान को हटाने के लिए विस्फोटकों का प्रयोग किया गया।
अधिकारियों ने किया भूस्खलन प्रभावित इलाके का दौरा
उधमपुर की उपायुक्त कृतिका ज्योत्सना ने भूस्खलन प्रभावित इलाके का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की है। रामबन के उपायुक्त मुसरत इस्लाम यातायात बहाल करने के लिए चलाए जा रहे कामों की खुद निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजमार्ग पर भूस्खलन और भूस्खलन से प्रभावित लगभग 30 क्षेत्रों में से 25 को बुधवार को ही साफ कर दिया गया था।
रामबन में एक निर्माणाधीन पुल भी बह गया
मालूम हो कि रामबन और उधमपुर जिलों में 33 स्थानों पर भूस्खलन, भूस्खलन और पत्थरबाजी के कारण मंगलवार शाम को राजमार्ग अवरुद्ध हो गया था। भारी बारिश के कारण सड़क पर मलबा आने से राजमार्ग का 150 फीट लंबा हिस्सा ध्वस्त हो गया था तथा रामबन में एक निर्माणाधीन पुल भी बह गया था।