
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले ने न केवल धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी विश्व स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। इस अवसर पर यूपी के विभिन्न जिलों के शिल्पकारों और कारीगरों ने अपनी कला और उत्पादों के साथ महाकुंभ में भाग लिया, जिससे पूरे मेले में एक अद्वितीय संस्कृति और कला का संगम देखने को मिला।महाकुंभ के दौरान हाथरस की प्रसिद्ध हींग ने विशेष पहचान बनाई। इस हींग की महक पूरे मेला क्षेत्र में फैल गई, जिसे दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी रुचि से खरीदा। हाथरस की हींग न केवल अपने स्वाद के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी शुद्धता और गुणों के लिए भी यह प्रसिद्ध है। मेले में आए लोगों ने इसे अपने घरों के लिए खरीदा और यूपी के इस खास उत्पाद को सम्मानित किया।वहीं, बागपत की चादरों की सुंदरता भी इस महाकुंभ में सबका ध्यान आकर्षित करने में सफल रही। बागपत के कारीगरों ने अपनी बुनाई और डिजाइन के जरिए इन चादरों को न केवल स्थानीय बाजारों में, बल्कि महाकुंभ में भी एक विशेष पहचान दिलाई। इन चादरों की मुलायमियत और सुंदरता ने दर्शकों को आकर्षित किया और यूपी के हस्तशिल्प की एक नई दिशा को दुनिया के सामने पेश किया।महाकुंभ के इस आयोजन में यूपी की कला और शिल्प की झलक केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि विश्वभर में दिखाई दी। इस दौरान हरियाली, हस्तशिल्प, वस्त्र, और पारंपरिक उत्पादों का विशेष बाजार भी सजाया गया, जिसमें यूपी के उत्पादों की मांग बढ़ी। यह महाकुंभ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी उत्तर प्रदेश की कला और उत्पादों को वैश्विक पहचान देने का एक अहम मंच बन गया।इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि यूपी की कला और संस्कृति आज भी जीवित है और समय के साथ विकसित हो रही है, जो भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण धारा है।