
देहरादून। उत्तराखंड में पहचान छिपाकर विवाह करने या लिव-इन संबंध में रहने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे मामलों की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति पर कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे। गृह विभाग ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में संशोधन करते हुए इस प्रावधान को शामिल किया है, जिसे जल्द ही अध्यादेश के रूप में लागू किया जाएगा।
हाल के दिनों में यह सामने आया है कि कई लोग अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर विवाह कर रहे हैं या लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। इनमें से कई व्यक्ति पहले से विवाहित होते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी पुरानी पहचान छिपाकर दूसरे पक्ष को धोखे में रखकर संबंध स्थापित कर लेते हैं। इस तरह के अनेक मामले सामने आने के बाद विभिन्न न्यायालयों में मुकदमे भी चल रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने समान नागरिक संहिता को और अधिक प्रभावी व सख्त बनाने का निर्णय लिया है।
संशोधित प्रावधानों के तहत पहचान छिपाकर विवाह या लिव-इन में रहना अब दंडनीय अपराध होगा। इसमें आर्थिक दंड के साथ-साथ कारावास की सजा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके अलावा यूसीसी में कुछ अन्य महत्वपूर्ण संशोधन भी किए गए हैं।
जनवरी 2025 से पहले हुए विवाहों के पंजीकरण की समय-सीमा को अब छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दिया गया है। इसके तहत 27 जनवरी से पहले सभी पुराने विवाहों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
एक अन्य संशोधन के अनुसार अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी भी रजिस्ट्रार जनरल के रूप में नियुक्त किए जा सकेंगे, जबकि पहले यह अधिकार केवल सचिव स्तर के अधिकारियों तक सीमित था। साथ ही समय पर कार्य न करने की स्थिति में अब सब-रजिस्ट्रार पर जुर्माने के बजाय पेनाल्टी लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त सब-रजिस्ट्रार को अपने विरुद्ध की गई कार्रवाई के खिलाफ अपील का अधिकार भी प्रदान किया गया है।
इन सभी संशोधनों को राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही इन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।