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ईरान संकट के बीच बड़ा कदम: न्यूजीलैंड का दूतावास बंद, भारत ने नागरिकों को किया सतर्क

ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और अधिक गहराता नजर आ रहा है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे को खुली चेतावनियां दी जा रही हैं, जिससे सैन्य संघर्ष की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

गुरुवार को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में तैनात अपने एक युद्धपोत का रुख ईरान की ओर मोड़ दिया है। इसके जवाब में ईरान ने भी एहतियातन अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इन घटनाओं के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि ईरान ने बुधवार को कुछ घंटों बाद अपना एयरस्पेस दोबारा खोल दिया था, लेकिन स्थिति अब भी सामान्य नहीं मानी जा रही है।

तनाव के चलते कई यूरोपीय एयरलाइंस ईरान के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने से बच रही हैं। ये एयरलाइंस अब अफगानिस्तान और मध्य एशिया के ऊपर से वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका के साथ जारी तनातनी के बीच भारत में स्थित ईरानी दूतावास के उप-उच्चायुक्त ने अमेरिका पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा एक बयान में आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ निराधार आरोप लगा रहा है और संयुक्त राष्ट्र का दुरुपयोग कर रहा है। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र को ईरान के विरुद्ध बेबुनियाद आरोपों का मंच बना दिया गया है।

इधर भारत सरकार ने क्षेत्रीय हालात को देखते हुए इस्राइल में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, तब तक इस्राइल की यात्रा न की जाए।

इस बीच पश्चिम एशिया के चार प्रमुख देशों—मिस्त्र, ओमान, सऊदी अरब और कतर—ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। ये सभी देश अमेरिका के सहयोगी माने जाते हैं और इन्होंने वॉशिंगटन से ईरान पर किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की है। इन देशों का मानना है कि यदि ईरान पर हमला हुआ तो इसके गंभीर सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव पूरे क्षेत्र पर पड़ेंगे, जिसका अंततः असर अमेरिका पर भी पड़ेगा।

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