
उत्तराखंड में कैंपा (कंप्रिहेंसिव एग्रीकल्चर एंड फारेस्ट्री प्रोग्राम) परियोजनाओं की निगरानी अब बाहरी संस्थाओं द्वारा की जाएगी। यह कदम राज्य सरकार ने केंद्रीय लेखा महानियंत्रक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर उठाया है, जिसमें कैंपा कार्यों में कई महत्वपूर्ण खामियों और अनियमितताओं की पहचान की गई थी। कैग की रिपोर्ट ने राज्य के वन विभाग में हड़कंप मचाया है, क्योंकि यह रिपोर्ट विभाग के कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है।कैग ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि कई परियोजनाओं में धन का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा था, और कुछ परियोजनाओं में काम की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं थी। इसके अलावा, कुछ कार्यों में मानकों का पालन नहीं किया गया था और कई बार बिना आवश्यक मंजूरी के परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कैंपा के तहत प्राप्त धन का इस्तेमाल पूरी तरह से नियमानुसार नहीं किया जा रहा था, जिससे परियोजना की सफलता पर सवाल उठने लगे थे।इस रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने इस मामले में तत्काल कदम उठाने का निर्णय लिया। अब कैंपा परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक बाहरी संस्था को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो विभाग द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा और जांच करेगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि इन परियोजनाओं में धन का सही उपयोग हो, और सभी कार्य मानकों और योजनाओं के अनुसार किए जाएं। इस पहल से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं न हों और परियोजनाएं अपने उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करें।बाहरी संस्था द्वारा निगरानी रखने का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना और विभाग के कार्यों में सुधार करना है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि आगे चलकर ऐसे मुद्दे न उठें। राज्य सरकार ने इस निर्णय के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब से पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम करें और सभी कार्यों की समीक्षा और निगरानी सही तरीके से हो।इस बदलाव से राज्य के वन विभाग में एक तरह की खलबली मच गई है, क्योंकि यह कदम विभाग के कामकाजी ढांचे को प्रभावित करेगा। कुछ अधिकारियों ने इस कदम को एक सकारात्मक दिशा में बढ़ाया हुआ कदम बताया है, जबकि कुछ अन्य ने इस पर सवाल भी उठाए हैं। उनका मानना है कि यदि विभाग में सुधार की आवश्यकता थी, तो इसे अंदरूनी सुधारों के माध्यम से किया जा सकता था, न कि बाहरी संस्था को इस काम में शामिल करके।हालांकि, राज्य सरकार और वन विभाग दोनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह कदम कैंपा परियोजना की सफलता के लिए आवश्यक है। इसके माध्यम से न केवल कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि राज्य के पर्यावरण और वन संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।अब देखना यह होगा कि बाहरी संस्था द्वारा की जाने वाली निगरानी राज्य की वन योजनाओं में कितनी पारदर्शिता लाती है और क्या इससे परियोजनाओं में सुधार होता है या नहीं।